


नवगछिया के रंगरा प्रखंड के ज्ञानीदास टोला और झल्लूदास टोला के ग्रामीणों ने कटाव रोकने के लिये गंगा नदी में 2250 फीट लंबा बंडाल बनाने का निर्णय लिया है. शुक्रवार को ही ग्रामीणों ने गंगा मैया की पूजा अर्चना कर बंडाल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है. जानकारी मिली है कि यह बंडाल गंगा नदी में उत्तर – दक्षिण दिशा में बनाया जा रहा है. बंडाल निर्माण में 1500 बांस लगने की संभावना है जबकि कार्य में 20 पारंपरिक रूप से कुशल मजदूरों को लगाया गया है और बड़ी संख्या में ग्रामीण खुद भी श्रमदान कर रहे हैं. ग्रामीण समाजसेवी विनोद कुमार मंडल ने बताया कि कुर्सेला से बांस मंगाया गया है. बंडाल बनाने में पांच से सात लाख रुपये लागत आने की संभावना है. ग्रामीण स्तर से चंदा कर रकम इकट्ठा किया जा रहा है. 10 से 15 दिनों में कार्य पूरा कर लिए जाने की संभावना है. बूढ़े बुजुर्गों का कहना है कि उक्त बंडाल के बनने से गांव की ओर बालू का फैलाव होगा और गंगा नदी कटाव नहीं कर सकेगी.

ग्रामीणों ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक झल्लूदास टोला और ज्ञानीदास टोला के पास से मरगंग प्रवाहित होती थी. कोई खतरा न था, लेकिन विगत वर्षों में गंगा नदी क्रमशः कोर्स चेंज करते हुए कहलगांव के पास तटों को छोड़ने लगी और लाल बहियार के पास पूरब से पश्चिम प्रवाहित होने लगी. इसका खामियाजा यह हुआ कि उनलोगों के गांव के पास मरगंग में गंगा नदी की मुख्य धारा प्रवाहित हो गयी जो लगातार कटाव कर रही है और लोग बेघर होने लगे हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले पिछले वर्ष स्थायी कटाव निरोधी कार्य और कटाव के समय बचाव कार्य किया गया जो निष्प्रभावी सिद्ध हुआ. लगभग दो किलोमीटर में बोल्डर पिचिंग से कटाव निरोधी कार्य करने की आवश्यकता है लेकिन पिछले वर्ष तक जलसंसाधन विभाग द्वारा कुछ मीटर में ही कार्य करवाया गया. इस बार 1000 किलोमीटर की कार्य योजना फाइलों में ही धूल फांक रही है. ग्रामीणों ने कहा कि मुकम्मल कटाव निरोधी कार्य नहीं कराया गया तो महज एक से दो वर्षों में लगभग 20 हजार लोग बेघर होंगे.
बंडाल के निर्माण कार्य में मुखिया गणेश प्रासाद मंडल, पूर्व मुखिया भोला मंडल, सिकंदर दास, भूमेश्वर दास, सरपंच विष्णुदेव शर्मा, उत्तर के सरपंच योगिंदर दास, सुबोध मंडल, अखिलेश कुमार, पूर्व मुखिया संजीत पासवान, पंचायत समिति प्रतिनिधि वकील मंडल, भिखन मंडल, बौधनारायन दास, समाजसेवी विनोद कुमार मंडल बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.
