


पर्व के दूसरे दिन व्रतियों ने गंगा स्नान के साथ साथ पूजन सामग्री को भी गंगा के पानी में धोयें
गोपालपुर
लोक आस्था का महापर्व छठ जो उगते और डूबते सूर्य उपासना का महापर्व है। प्रकृति की उपासना का यह पर्व होता है।जहां स्वयं सूर्य की पूजा की जाती है जहां से हमें सारी ऊर्जा मिलती है। इसी ऊर्जा और आस्था के आगे छठ व्रतियों की सारी कठिनाइयों दूर हो जाती है। यही आस्था और ऊर्जा का दृश्य गोपालपुर प्रखंड के तिनटंगा जहाज घाट पर छठ पर्व के दूसरे दिन यानी खरना के दिन देखने को मिला।

छठ व्रतियों ने गंगा स्नान तो किया ही सैकड़ों की छठ व्रतियों ने गंगा स्नान कर छठ पूजा पर चढ़ाए जाने वाले प्रसाद सूप, डाला,नारियल, गन्ना, नींबू, पूजा में उपयोग होने वाले कपड़ा, यहां तक की प्रसाद के लिए गेहूं तक गंगा पानी में धोए। गंगा के आसपास के लोग खरना के दिन सर पर डाला लेकर गंगा तट पर पहुंचे। पूरी तरह प्रकृति में पर्व सराबोर हो गया। गंगा घाट पर अपने मां के साथ आई तिनटंगा करारी गांव के निवासी काजल कुमारी ने बताये कि इस महापर्व में गंगाजल का बहुत बड़ा महत्व है।

जिस पानी में थोड़ा सा भी गंगाजल मिल जाए वह पानी गंगाजल हो जाता है। लेकिन हम लोग गंगा के आसपास क्षेत्र के लोग हैं इसलिए हमारे यहां वर्षों से परंपरा है। कि गंगा से धोकर साफ सुथरा कर ही छठ का प्रसाद गंगा तट से पूजा स्थल पर ले जाते है।दिन में गेहूं को सुखातै हैं।इसलिए वह अपने परिजन के साथ गंगा तट पर आई हैं।
