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भागलपुर: भारतीय महिलाओं की सुहागन होने की पहचान के रूप में सिंदूर का बहुत महत्व है। जहां एक तरफ बाजार में पतियों द्वारा खरीदी गई सिंदूर महिलाएं अपने मांग में सजाती हैं, वहीं भागलपुर जिले के पंसल्ला गांव की महिलाएं बाबा बालकेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में लगे सिंदूर के पेड़ से निकला सिंदूर अपनी मांग में सजाती हैं। इस पेड़ में जो फल होता है, उसके बीज से सिंदूर निकाला जाता है। महिलाओं का कहना है कि इस प्राकृतिक सिंदूर में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे यह और भी सुरक्षित और लाभकारी है।

पंसल्ला गांव के इस सिंदूर के पेड़ में जो बीज मिलता है, उसे महिलाएं तोड़ कर हाथों में रगड़ती हैं, जिससे सिंदूर निकल आता है। महिलाएं इसे खासकर शादी और पूजा के समय उपयोग करती हैं। इस सिंदूर को लेकर स्थानीय समाजसेवी राम बालक मंडल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह सिंदूर पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसके इस्तेमाल से कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं होती, जबकि बाजार के सिंदूर में मिलावट हो सकती है, जिससे बालों का झड़ना और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

राम बालक मंडल, मेले के आयोजक और समाजसेवी ने यह भी कहा कि इस पेड़ के प्रति लोगों की आस्था अद्भुत और अतुलनीय है, जो इसे और भी खास बनाती है।

बाइट: महिला 1

“हम इस सिंदूर का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और बाजार के सिंदूर से कहीं ज्यादा सुरक्षित है।”

बाइट: महिला 2

“यह सिंदूर हमारे लिए शुभ और पवित्र होता है, हम इसे अपनी पूजा और मांग में लगाती हैं।”

बाइट: राम बालक मंडल, समाजसेवी और मेला आयोजक

“यह सिंदूर पूरी तरह से प्राकृतिक है, इसमें कोई मिलावट नहीं है, और यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।”

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