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भागलपुर : भारतीय रेलवे गर्व के साथ विद्युत ट्रैक्शन की शताब्दी (1925-2025) मना रहा है, जो रेलवे की प्रौद्योगिकी प्रगति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है। इसी उपलक्ष्य में मालदा डिवीजन के जामलपुर डीजल शेड में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों और इंजीनियरों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम में सीनियर डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियर (डीजल) कृष्ण कुमार दास की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान भारतीय रेलवे में हुए विद्युत ट्रैक्शन के विकास पर चर्चा की गई और इसकी उपलब्धियों को रेखांकित किया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि विद्युत ट्रैक्शन ने भारतीय रेलवे को न केवल अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया है, बल्कि परिचालन दक्षता और लागत बचत में भी अहम योगदान दिया है।

जामलपुर डीजल शेड का ऐतिहासिक योगदान

जामलपुर डीजल शेड की स्थापना 12 दिसंबर 1991 को हुई थी। यह 1,00,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और शुरुआत में डीजल लोकोमोटिव की मरम्मत पर केंद्रित था। लेकिन रेलवे की विद्युतीकरण नीति के तहत इस शेड में धीरे-धीरे विद्युत प्रणाली को अपनाया गया।

नवंबर 2021 में जामलपुर डीजल शेड ने पहली बार विद्युत लोकोमोटिव की मरम्मत कार्य शुरू किया। वर्तमान में यह शेड 26 विद्युत लोकोमोटिव की देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी निभा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से ईंधन लागत में कमी आई है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

इस आयोजन के दौरान रेलवे कर्मचारियों के योगदान को भी सराहा गया और उन्हें इस ऐतिहासिक परिवर्तन का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रेलवे के भावी विद्युतीकरण लक्ष्यों और नई तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा की गई, जिससे भारतीय रेलवे को और अधिक कुशल और टिकाऊ बनाया जा सके।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि 2025 तक रेलवे का लक्ष्य 100% विद्युतीकरण प्राप्त करना है, जिससे इसे कार्बन न्यूट्रल बनने में सहायता मिलेगी। इस उपलब्धि से भारतीय रेलवे दुनिया के अग्रणी पर्यावरण-अनुकूल रेलवे नेटवर्क में शामिल हो जाएगा।

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