


नवगछिया घाट ठाकुरवाड़ी में चल रहे रामचरित मानस के 50वीं स्वर्ण जयन्ती समारोह के सातवें दिन प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी विनोदानन्द सरस्वती ने राम कथा के माध्यम से धार्मिक और जीवन मूल्य पर गहरी बातें साझा कीं। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को राम के नाम की महिमा और उसके जीवन में होने वाले प्रभाव के बारे में बताया। स्वामी जी ने कहा कि, “जो काम राम से जोड़कर किया जाए, वह कभी भी विफल नहीं हो सकता। अगर हम किसी भी काम को राम के नाम से करें, तो उसमें निश्चित ही सफलता मिलेगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार के अंदर अगर कोई लड़ाई-झगड़ा होता है, तो हमें अपने आप को समझाने की जरूरत है, और किसी और को समझाने से पहले खुद को समझें। “अगर कोई काम पूरी सृष्टि में धोखा देने का हो, तो वह केवल मानव ही करता है, क्योंकि पशु कभी विश्वासघात नहीं कर सकता,” स्वामी जी ने कहा।

कथा के दौरान स्वामी जी ने भक्तों को भजन ‘लेना खबर हमारी ही धनुष दरी’ और ‘अपना बना कर मुझको ठुकरा ना देना’ जैसे भजनों से भी खूब झुमाया। राम भक्तों ने इन भजनों का आनंद लिया और पूरी सभा में भक्ति का माहौल बना।
यह नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन 7 अप्रैल तक चलेगा। इस आयोजन में पं. चंदन झा के आचार्यत्व में 21 विद्वानों के द्वारा नवाह पारायण संगीतमय रूप से प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक रामचरित मानस का पाठ किया जा रहा है।

इस विशाल धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के सदस्य अत्यधिक मेहनत कर रहे हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में सचिव शिव जायसवाल, अध्यक्ष दिनेश सरार्फ, उपाध्यक्ष बनवारी पंसारी, कोषाध्यक्ष सरवन केडिया और मीडिया प्रभारी अशोक केडिया, किशन यादुका, संतोष यादुका, संतोष भगत, अनिल चिरानिया, अनिल भगत, विनीत खेमका, कैलाश अग्रवाल, विशाल चिरानिया, जुगनु भगत, दयाराम चौधरी, किशन चिरानियाँ, शंकर चिरानियाँ सहित अन्य लोग पूरी तरह से सक्रिय हैं।

यह आयोजन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर बन चुका है, जिसमें हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए जुटे हैं। राम कथा के माध्यम से श्रद्धालु आत्मिक शांति और भक्ति में लीन हो रहे हैं।
