


नवगछिया, नवगछिया पुलिस जिले के भवानीपुर में एक दिल दहला देने वाली हत्या की घटना सामने आई है, जिसमें एक 14 वर्षीय युवक शुभम झा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल पुलिस जिले में बढ़ते अपराधों और नशीली दवाओं के कारोबार पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शुभम झा का जीवन

शुभम झा के परिवार में खुशियां थीं, जब वह घर का इकलौता पुत्र था और उसकी पढ़ाई में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। उसकी उम्र महज 14 वर्ष थी और वह हाईस्कूल नवगछिया का छात्र था। शुभम का नाम उसके माता-पिता ने ‘शुभम’ रखा था, क्योंकि वह उनके लिए एक आशीर्वाद की तरह था। उसके पिता, बालकृष्ण मिश्रा, एक प्राइवेट शिक्षक थे और कोचिंग में भी छात्रों को पढ़ाते थे। घर में चारों तरफ खुशियों का माहौल था, लेकिन एक हादसे ने इस खुशहाल परिवार को बुरी तरह प्रभावित किया।
कुछ माह पहले बालकृष्ण मिश्रा किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी इलाज पर लाखों रुपये खर्च हो गए थे, लेकिन वह बीमारी से उबर नहीं पाए। 3 सितंबर 2024 को उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिवार की स्थिति और भी कठिन हो गई। इस कठिनाई का असर शुभम पर पड़ा और वह मानसिक रूप से कमजोर हो गया।

पिता की मौत के बाद शुभम की जिंदगी में बदलाव
पिता की मौत के बाद शुभम की मानसिक स्थिति और भी बिगड़ गई। उसने न केवल अपने पिता की मौत का शोक मनाया, बल्कि स्मैक जैसी नशीली दवाओं का सेवन करना भी शुरू कर दिया। शुभम के लिए यह दौर अत्यंत कठिन था और उसके जीवन में कई नकारात्मक बदलाव आए। वह धीरे-धीरे नशीली दवाओं का आदी हो गया और इसके कारण उसने कई गलत रास्तों का अनुसरण किया।
उसने अपनी आदतों को छुपाने के लिए घर से पैसे लेकर अपने दोस्तों पर खर्च करना शुरू कर दिया। उसकी दोस्ती कई 30 से 35 वर्ष के पुरुषों से हो गई थी, जो भी स्मैक के आदी थे। इन दोस्तों के साथ बिताए गए समय ने शुभम को और भी अधिक नशीला बना दिया। घर वाले उसकी आदतों से अनजान थे, लेकिन शुभम की यह बदलती हुई आदतें अंततः उसकी मौत का कारण बन गईं।
शुभम की हत्या

घटना के दिन शुभम गुरुवार को तीन बजे घर से निकला और रात को नौ बजे घर लौटा। वह जैसे ही घर में घुसा, उसे किसी ने फोन किया और फिर वह फिर से घर से बाहर निकल गया। इसके कुछ ही देर बाद यह खबर मिली कि शुभम को गोली मार दी गई है। घटना के सम्बंध में परिजनों ने बताया कि शुभम के पास 70 हजार रुपये थे, लेकिन वह रुपये और उसका मोबाइल दोनों ही गायब थे। घटना से पहले शुभम को बेरहमी से पीटा गया था, और उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। उसकी सीने की हड्डी टूटी हुई थी और उसके सिर तथा केहूनी में भी चोटें थीं।
शुभम की हत्या के पीछे एक बड़ा कारण सामने आ रहा है, और वह है नवगछिया में बढ़ता स्मैक का कारोबार। भवानीपुर क्षेत्र में स्मैक का धंधा बहुत तेजी से बढ़ रहा है, और यह मुख्य रूप से युवाओं के बीच नशे का कारण बन रहा है। खासकर शराबबंदी के बाद से यह कारोबार और भी तेजी से बढ़ा है। नवगछिया के चाय की दुकानों, पान की दुकानों और जिम्स में भी स्मैक का धंधा चल रहा है।
घटना स्थल से महज 200 मीटर की दूरी पर नवगछिया थाना है, और पुलिस अधीक्षक का कार्यालय भी घटना स्थल से महज 500 मीटर दूर स्थित है। इसके बावजूद नवगछिया पुलिस ने इस नशीले कारोबार को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। पुलिस को पूरी जानकारी होने के बावजूद वह कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा देती है।
घटना के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया
इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने स्थिति पर कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दी। पुलिस ने घटना स्थल से पांच गोलियों के खोखे बरामद किए, जो यह साबित करता है कि यह हत्या एक संगठित अपराध का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, नवगछिया पुलिस इस मामले में कोई सटीक जानकारी देने से बच रही है।
पुलिस का कहना है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। पुलिस की इस लापरवाही ने पूरी घटना को और संदिग्ध बना दिया है। घटना स्थल पर दोनों मृतकों के पास और उनके साथियों के पास हथियार पाए गए थे, जो यह साबित करता है कि घटना एक योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा हो सकती है।
शुभम के माता-पिता की स्थिति अत्यंत कठिन हो गई है। उनके इकलौते बेटे की हत्या ने परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया है। उनकी तीन बेटियां हैं—प्रियंका कुमारी, सारिका कुमारी और मोनिका कुमारी। प्रियंका की शादी हो चुकी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश उसके पति की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। प्रियंका अब भी अपने मायके में ही रहती है और परिवार का सहारा बनी हुई है।
घटना के बाद परिवार के सदस्य शोक में डूबे हुए हैं और इस दुखद घटना का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।