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मां सीता की जयंती पर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक हुआ विशेष धार्मिक आयोजन

नवगछिया : श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया में मां सीता की जयंती पर गुरुवार को सुबह पांच बजे से रात 11 बजे तक विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। संपूर्ण आयोजन श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य में हुआ। अध्यक्षता आचार्य ब्रजमोहन सिंह लाल लाल ने की। स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि मां सीता का जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ है। मां सीता ही महासरस्वती हैं, महालक्ष्मी और महाकाली हैं। सृष्टि का पालन, पोषण और संहार करतीं हैं।
इस अवसर पर भजन सम्राट डा. हिमांशु मोहन मिश्र दीपक जी के अपनी भजनों से सभी भावविभोर कर दिया। सीतामढ़ी पुनौरा में सिया प्रकट भईं हैं, शुभ वैशाख शुक्ल तिथि नवमी जनकपुण्य फल मिथिला में, सिया प्रकट भईं हैं। इस भजन के माध्यम से उन्होंने सीता जन्म के सभी दृष्टांत को सुना दिया। दीपक जी ने कहा कि एक समय मिथिला में भयंकर अकाल पड़ा था। उस समय के पंडितों ने राजा जनक को यज्ञ करने और खेतों में हल जोतने को कहा। पुनौरा में यज्ञ हुआ और इसके बाद उसी जगह राजा जनक ने हल चलाया।

हल की नोक से एक दिव्य रथ प्रगट हुआ। जिसपर 16 वर्ष की एक किशोरी बैठी हुई थी। जनक ने उनको प्रणाम किया। अचानक किशोरी नवजात शिशु बन गई। जनक जी ने उसे गोद में उठा लिया। माता सुनैना के हृदय में वात्सल्य उमड़ गया। स्तन दूध से भर गए। सुनैना उस बच्ची को दूध पिलाने लगी। हल की नोक को सीता कहते हैं, इसलिए बच्ची का नाम सीता पड़ा। उनका एक नाम भूमिजा भी है, क्योंकि भूमि से सीता की उत्पत्ति हुई है। इसके बाद मिथिला में खूब वर्षा हुई और सभी खुशहाल हो गए।
इसके पहले श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया में सुबह मंगल आरती हुई। वेदपाठ किया गया। वहां स्थापित सभी देव-देवताओं का पूजन हुआ। दुर्गा सप्तशती, हनुमान चालिसा और सुंदरकांड का सामुहिक पाठ हुआ। स्वामी आगमानंद जी महाराज ने पांच सौ से ज्यादा लोगों को आज आध्यात्मिक दीक्षा दी। इस आयोजन में पंडित ज्योतिन्द्र नाथ चौधरी, वेदांती शंभुनाथ शास्त्री, प्रो. डा. मथुरा प्रसाद दूबे, गीतकार राजकुमार, दिलीप शास्त्री ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में भागलपुर, नवगछिया के अलावा सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, खगड़िया, बांका से काफी संख्या में लोग वहां पहुंचे थे। बलवीर सिंह बग्धा सहित एक दर्जन कलाकरों ने वहां भजनों की प्रस्तुति दी। दिन भर वहां भंडारा हुआ। लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर शिव प्रेमानंद भाई, स्वामी मानवानंद स्वामी, पंडित प्रेम शंकर भारती, मनोरंजन प्रसाद सिंह, कुंदन बाबा, रामबालक भाई, सौरभ सोनू, सुबोध आदि वहां मौजूद थे।

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