


नवगछिया – मेडिकल केमिस्ट्री फॉर द सोसाइटी विषय पर इंडियन केमिकल सोसायटी भागलपुर चैप्टर द्वारा एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया. जिसका उद्घाटन इंडियन केमिकल सोसायटी कोलकाता के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर जीडी यादव ने किया.

प्रोफेसर यादव ने उद्घाटन भाषण में कहा कि छः नोबेल पदक विजेताओं ने इंडियन केमिकल सोसायटी की सदस्यता ली है. यह खुशी की बात है. इस अवसर पर प्रोफेसर डीसी मुखर्जी ने भी अपने विचार को व्यक्त करते हुए कहा कि सोसायटी का मुख्य ध्येय विज्ञान को समाजोपयोगी बनाना है. सोसायटी के सचिव प्रीफेसर चितरंजन सिन्हा ने भी ने भी मेडिसिनल रसायन पर अपना व्याख्यान दिया.

भागलपुर चैप्टर के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक कुमार झा ने आमंत्रित वक्ताओं एवं अतिथियों का स्वागत किया. आईआईटी रोपड़ के प्रोफेसर असित कुमार चक्रवर्ती ने मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा कि औषधि का उद्गम प्राकृतिक स्रोत से एवं दवाओं के संश्लेषण में ग्रीन केमेस्ट्री के सिद्धांतों को अपनाए जाने की जरूरत है. दवा के संश्लेषण में कार्बनिक घोलक के स्थान पर जल को अपनाए जाने की जरूरत है. असीम चटर्जी फाउंडेशन के सचिव प्रोफेसर विश्वपति मुखर्जी ने अपने व्याख्यान में बताया कि प्राकृतिक स्रोत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक 37 पेटेंट लिया जा चुका है. उन्होंने वेद एवं उपनिषद् से जोड़कर आधुनिक औषधि की व्याख्या की.

आईआईसीटी हैदराबाद के प्रधान वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर चितरंजन पात्रा ने कैंसर के इलाज हेतु नैनो कण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विनोद कुमार तिवारी ने औषधि संश्लेषण के क्षेत्र में की उपयोगिता पर प्रकाश डाला. राष्ट्रीय वेबिनार के द्वितीय तकनीकी सत्र में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ अभिजीत ने अपना व्याख्यान सार्स कोविड-19 पर देते हुए बताया कि पिरीमीडिन व्युत्पन्न भी कोविड-19 के लिए काफी असरदार है.

डॉ रवि शंकर सिंह तथा आरएमएल अवध विश्वविद्यालय के डॉ बीएन सिंह ने भी अपना व्याख्यान दिया तो डॉ उषा शर्मा एवं डॉ बिंदेश्वरी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया. डॉ निशांत सिंह ने वक्ताओं का परिचय कराया और शोध छात्र शैलेश कुमार ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया. दोनों वैज्ञानिक सत्रों में लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
