


जांच करने विद्यालय पहुंचे डीपीओ व बीईईओ
नवगछिया जिला परिषद नंदनी सरकार ने कमिश्नर को दिया आवेदन
नवगछिया प्रखंड के कोसी पार मध्य विद्यालय लोकमानपुर कदवा में एनजीओ के द्वारा शुक्रवार को लगातार दुसरे दिन कीड़ा युक्त मध्याह्न भोजन भेजे जाने पर वहां के ग्रामीणों ने हंगामा किया था. जिसके बाद तीसरे दिन शनिवार को डीपीओ आनंद विजय, बीईईओ मोहम्मद अस्पाक अंसारी के साथ एमडीएम प्रभारी दुर्गा कुमारी जांच करने विद्यालय पहुंचे. जांच के दौरान ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंच कर पदाधिकारियों के सामने कीड़ा युक्त मध्याह्न भोजन भेजे जाने की शिकायत करते हुए हंगामे किया । ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल में एनजीओ के द्वारा घटिया भोजन भेजा जाता हैं.

जो भोजन बच्चे खाना नहीं चाहते हैं. हालांकि शनिवार को खिचड़ी चोखा भेजा गया था. जो करीब ठीक-ठाक ही था. सिर्फ चोखा में साबूत आलू निकल रहा था । विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामदेव रजक ने बताया कि- चौथी कक्षा तक के बच्चे ने भोजन तो कर लिया. लेकिन पांचवीं व छठी कक्षा के कुछ होशियार बच्चे ने घटिया भोजन समझ कर उसके थाली में परोसे गए भोजन को स्कूल परिसर में फेंक दिया. वहीं तीसरे दिन भी जिप नंदनी सरकार ने विद्यालय पहुंच कर एमडीएम की जांच की जहां घटिया तरीके से चोखा बना हुआ देखा. ग्रामीणों कह रहे थे कि जब स्कूल में भोजन बन था था तो कभी कोई शिक़ायत नहीं मिला. जब से एनजीओ के द्वारा खाना आ रहा है वह घटिया तरीके से पका हुआ आता है.

जिस पर डीपीओ ने कहा है कि- यदि एनजीओ का खाना पसंद नहीं है तो, इसके लिए विभाग को लिख कर, स्कूल में हीं खाना बनवाने की अनुशंसा की जाएगी.
जिप नंदनी सरकार ने आयुक्त को आवेदन देकर किया शिकायत
मध्य विद्यालय लोकमानपुर कदवा में एनजीओ के द्वारा भेजे जा रहे मध्याह्न भोजन में बराबर कीड़ा निकलने एवं सड़ा हुआ खाना दिए जाने पर नवगछिया जिला पार्षद नंदनी सरकार नें मुख्य कार्यपालक उप विकास आयुक्त भागलपुर को एक लिखित आवेदन देकर शिकायत की है. साथ हीं आवेदन में कहा है कि- मध्याह्न भोजन खाने से 10 बच्चे बीमार भी पड़ गए थे. बच्चे देश के भविष्य हैं. उनके साथ इस तरह का अन्याय बिल्कुल बर्दाश्त करने योग्य नहीं है. बच्चों के साथ न्याय की मांग की है.
वही शनिवार को विद्यालय में दिनभर हो हंगामे की स्थिति रही. जांच में पदाधिकारी पहुंचने के बाद स्कूल का माहौल तनावपूर्ण रहा। विद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित थे लेकिन विद्यालय का माहौल पठन-पाठन योग्य नहीं था ।
