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@ग्रामीण बच्चों के बीच सांस्कृतिक, मानवीय और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रयासरत
नवगछिया : सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था “समवेत” ने अपने स्थापना के दस वर्ष पूरे किए। इस अवसर पर संस्था के सदस्यों ने अपनी यात्रा के अनुभव, उपलब्धियों और चुनौतियों को साझा किया, तथा संस्था की शानदार दस साल की यात्रा का उत्सव मनाया। इस कार्यक्रम के दौरान संस्था द्वारा अपने कार्यक्षेत्र सन्हौला और खरीक प्रखंड के अनुसूचित जाति और जनजातीय समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति पर आधारित शोध रिपोर्ट का लोकार्पण भी किया गया।
लोकार्पण समवेत की अध्यक्ष छाया पांडे, गांधीवादी विचारक मनोज मीता, समाज सेविका अरुणिमा सिंह, समवेत के सचिव डॉ. सुनील कुमार साह, निदेशक श्री विक्रम, शिक्षाविद शाहीन अनीस और समवेत की वर्षा ने संयुक्त रूप से किया।
यह रिपोर्ट उक्त समुदाय के लगभग ग्यारह सौ परिवारों से बातचीत और संवाद के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों और तथ्यों पर आधारित है। विशेष रूप से बच्चों की शैक्षिक स्थिति की पड़ताल करते हुए इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, वहीं बच्चों के स्कूल छोड़ने के संबंध में कई आंकड़े सोचने को मजबूर करते हैं।
संस्था के सचिव डॉ. सुनील कुमार साह ने बताया कि सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था “समवेत” एक दशक से विभिन्न सांस्कृतिक माध्यमों के द्वारा सुदूर गांवों के बच्चों के बीच सांस्कृतिक, मानवीय और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए प्रयासरत है। संस्था बच्चों को नाटक जैसी विधाओं से परिचित कराकर जहां रंगकर्म की नई पौध तैयार कर रही है, वहीं नाटक को लोक यानी आम लोगों से जोड़ भी रही है।
संस्था की अध्यक्ष छाया पांडे ने कहा कि अपने हक की बात कह पाना महिलाओं, दलितों और वंचित वर्ग के लिए आज भी आसान नहीं है। समवेत इस अभिवंचित वर्ग की अभिव्यक्ति को मुखर बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है।
निदेशक विक्रम ने बताया कि संस्था ने विभिन्न कला माध्यमों को बदलाव का औजार बनाया है। नाटक, गीत, पेंटिंग, कार्टून आदि के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में संस्था के सभी सदस्यों ने भविष्य की कार्ययोजना और कार्यक्रमों पर भी चर्चा की। इस अवसर पर आशीष कुमार दास, श्यामल सिंह, सुनील कुमार मंडल, नूतन कुमारी, सपना कुमारी, करूणा चोखानी, राहुल कुमार, ओजल आदि उपस्थित थे।