


भागलपुर शहर में बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयासों के तहत, पुराने और जर्जर बिजली तारों और लोहे के खंभों को बदला जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान बिजली विभाग और ठेकेदार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बिजली तार और खंभे बदलने का काम कर रहे मिस्त्रियों को न तो हेलमेट दिया जा रहा है और न ही सेफ्टी किट, जिससे उनकी सुरक्षा को भारी खतरा पैदा हो गया है। स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है जब छोटे बच्चों को 10 से 12 फीट ऊंचे खंभों पर चढ़ाकर तार बदलवाने का काम करवाया जा रहा है, जो न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अत्यंत खतरनाक भी है।

जब इस विषय पर वहां मौजूद कर्मचारियों से बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे ठेकेदार की जिम्मेदारी बताई। अब सवाल यह है कि अगर इस लापरवाही के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा—बिजली विभाग, ठेकेदार, या दोनों?

