

कैंप जेल और शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में बंद दो कैदियों की इलाज के दौरान मौत हो गयी। कैंप जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे प्रशांत कुमार सिंह उर्फ बाबू साहब (26) की मायागंज स्थित जेएलएनएमसीएच में रात लगभग 10 बजे मौत हो गयी।

प्रशांत मुंगेर जिले के नया रामनगर थाना क्षेत्र के रामनगर का रहने वाला था। केंद्रीय कारा में बंद खगड़िया जिले के सदर थाना क्षेत्र के मदास के रहने वाले शिव साह (55) की शनिवार की सुबह जेएलएनएमसीएच में मौत हो गयी। प्रशांत के परिजन ने कहा कि जेल प्रशासन ने उन्हें बताया है कि उसकी कोरोना जांच कराई गयी थी जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आयी थी। सेंट्रल जेल की अधीक्षक ने भी बताया कि शिव साह की कोरोना जांच कराई गयी थी, रिपोर्ट निगेटिव आयी थी।

प्रशांत को टीबी था, 2016 से कैंप जेल में बंद था
प्रशांत के छोटे भाई निशांत गौतम ने बताया कि जनवरी 2013 में गांव के ही राजीव सिंह हत्याकांड में वह अभियुक्त था। पहले वह मुंगेर जेल में बंद था। 2016 में उसे कैंप जेल लाया गया था। निशांत ने बताया कि दो अगस्त को जेल से उन्हें कॉल आया था और बताया कि प्रशांत को टीबी की बीमारी है और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसका कहना है कि तीन अगस्त को वह अपने भाई से मिलने भी आया था तो प्रशांत ने बताया था कि उसे सांस लेने में परेशानी हो थी। उसने बताया कि शुक्रवार की रात उन्हें कॉल आया कि प्रशांत की मौत हो गयी। शिव साह के बारे में सेंट्रल जेल अधीक्षक ने बताया कि उसे 10 साल की सजा हुई थी और 2017 से वह सेंट्रल जेल में बंद था। उसे दमा की शिकायत थी।

मजिस्ट्रेट के इंतजार में घंटों खड़े रहे परिजन
कैदी की मौत के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान होना जरूरी होता है। प्रशांत की मौत शुक्रवार की रात में ही हो गयी थी और जेल अधीक्षक ने मजिस्ट्रेट के लिए भी लिखा था। जगदीशपुर सीओ को मजिस्ट्रेट बनाया गया था। प्रशांत के परिजनों का कहना था कि दोपहर ढाई बजे तक मजिस्ट्रेट नहीं पहुंचे जिस वजह से शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा जा सका।
